भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव को घेरा. एससी वित्त एवं विकास निगम अध्यक्ष लालजी निर्मल ने लखनऊ में प्रेस कॉफ्रेंस कर कहा कि पूर्व सीएम अखिलेश यादव साफ करें कि वह प्रमोशन में आरक्षण के समर्थक हैं या विरोधी? उन्होंने कहा कि यूपी के लाखों दलित कार्मिकों अखिलेश यादव की सरकार ने रिवर्ट किया था. ऐसे में सपा बसपा गठबंधन नापाक नहीं है तो अखिलेश यादव अपनी स्थिति स्पष्ट करें. अगर वह प्रमोशन में आरक्षण के हिमायती हैं तो अपने पूर्व में उठाए गए कदम के लिए दलितों से माफी मांगें.

लालजी निर्मल ने कहा कि भारत सरकार के डिपार्टमेंट आॅफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने 15 जून 2018 को केंद्र और प्रदेश सरकारों को प्रोन्नति में आरक्षण लागू करने के आदेश जारी किए हैं. हम इसका स्वागत करते हैं. प्रोन्नति में आरक्षण देश के दलितों के लिए एक बहुत बड़ा मुद्दा है. लंबे अर्से से दलित कार्मिक ये मांग कर रहे थे कि प्रोन्नति में आरक्षण लागू किया जाए.

उन्होंने कहा कि यूपी विशेष तौर पर इस व्यथा से पीड़िता था क्योंकि यहां लाखों कार्मिक रिवर्ट कर दिए गए थे. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव के मैनिफेस्टो घोषित किया था कि हम प्रमोशन के आरक्षण के खिलाफ हैं. सत्ता में आने पर इसे खत्म करेंगे. यही नहीं इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश का आरक्षण अधिनियम 1994 के नियम 3 (7) को समाप्त किया. तो तत्कालीन अखिलेश सरकार ने बिना किसी उपाय किए या सुप्रीम कोर्ट के पुनर्विचार याचिका दायर किए तत्काल कार्यवाही कर दी. उन्होंने लाखों दलित कार्मिकों को रिवर्ट कर दिया.



लालजी निर्मल ने कहा कि मेरा मानना है कि अखिलेश यादव का ये बहुत बड़ा गुनाह था. यह दलित विरोधी कदम था. अखिलेश यादव को अपना स्टैंड क्लियर करना ही पड़ेगा कि वे प्रमोशन में रिजर्वेशन के अब भी विरोधी हैं या उसका समर्थन करते हैं. क्योंकि उनका इस आरक्षण का समर्थन करने वाली बसपा के साथ गठबंधन हो रहा है.

लालजी निर्मल ने कहा कि अगर वह यह कहते हैं​ कि प्रमोशन में आरक्षण का समर्थन करते हैं तो इसके साथ ही उन्हें बिना कोई मौका दिए दलितों को रिवर्ट करने के फैसले पर देश से माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गठबंधन नापाक नहीं है तो अखिलेश स्टैंड क्लियर करें. आरक्षण विरोधी और समर्थक एक साथ कैसे खड़े हैं.
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